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19 April 2020 Janiye Bemail Vivah Hone Ki Wajeh Kundali Ke Konse Ye Yog Bante Hai Karan / जानिए बेमेल विवाह होने की वजह, कुंडली के कौन से योग बनते

Janiye Bemail Vivah Hone Ki Wajeh Kundali Ke Konse Ye Yog Bante Hai Karan / जानिए बेमेल विवाह होने की वजह, कुंडली के कौन से योग बनते

https://youtu.be/bGzGTDQIMQo

जानिए बेमेल विवाह होने की वजह, कुंडली के कौन से योग बनते है कारण

कई बार बेमेल विवाह भी देखा जाता है जैसे किसी विधवा से विवाह होना या भावुकता वश किसी परित्यक्ता से विवाह कर लेना आदि अथवा वर-वधु की आयु में सामान्य से अधिक अंतर होना भी देखा गया है। ऐसी शादी के कई कारण होते हैं।

1) जन्म कुंडली में कर्क राशि में शुक्र व राहु की युति होने से भावुकतावश जातक ऐसा कदम उठाता है।
2) लग्न में मिथुन राशि में सूर्य स्थित हो तब व्यक्ति का अस्थिर स्वभाव होने से ऐसा हो सकता है क्योंकि मिथुन राशि द्विस्वभाव मानी गई है।
3) जन्म कुंडली में बुध यदि राहु के साथ स्थित हो तब व्यक्ति अस्थिर मानसिकता का होने के कारण परंपराओं का पालन नहीं करता है।
4) चंद्र यदि सप्तम भाव में स्थित हो स्थित हो जातक मानसिकता अस्थिरता अथवा चपलता के कारण ऐसा कर सकता है। यदि सप्तम भाव में धनु राशि का चंद्रमा हो तब जातक परंपराओं का उल्लंघन करने वाला होता है।
5) अष्टमेश यदि कुंडली के पंचम भाव में स्थित है तब भी बेमेल संबंध बन जाते हैं।
6) किसी जन्म कुंडली में चंद्रमा के साथ शनि स्थित हो तब जातक मानसिक तनाव में आकर बेमेल विवाह का कदम उठा सकता है। इस योग में जातक द्वारा नशीले पदार्थों का सेवन भी किया जा सकता है।
7) जन्म कुंडली का पंचम भाव प्रेम संबंधों के लिए भी देखा जाता है। यदि किसी कुंडली में पंचमेश बारहवें भाव में स्थित है तब अंतर्जातीय विवाह हो सकता है अथवा बेमेल विवाह के योग भी बन सकते हैं।
8) जन्म कुंडली में सूर्य यदि अपनी नीच राशि तुला में स्थित है तब भी जातक परंपराओं का त्यागकर कुछ अमान्य संबंध बना सकता है।
9) यदि किसी जन्म कुंडली में चंद्रमा तथा मंगल पंचम भाव में युति कर रहे हों तो अधिकाँश संबंध कामुकता के वश में होकर बनते हैं। यदि बुध व राहु भी पंचम भाव में स्थित है तब जातक की मानसिक अस्थिरता के कारण संबंध बन सकते हैं।
10) यदि किसी कुंडली में द्वितीयेश के साथ सप्तमेश का किसी भी तरह से संबंध स्थापित हो रहा है तब प्रेम विवाह पहले से जानने वाले व्यक्ति से हो सकता है।
11) पुरुषों की कुंडली में शुक्र को कामेच्छा का ग्रह माना जाता है और स्त्री कुंडली में मंगल को माना गया है। जब किसी स्त्री की जन्म कुंडली में मंगल के ऊपर से गोचर के राहु अथवा शनि गुजरते हैं तब उस स्त्री का किसी पुरुष से संबंध स्थापित हो सकता है।
12) जन्म कुंडली में मंगल का संबंध किसी भी तरह से पंचम अथवा पंचमेश से बन रहा हो या लग्न अथवा लग्नेश से बन रहा हो तब भी संबंध स्थापित होने की संभावना बनती है।
 

 

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